दूसरे सावन सोमवार को 75 वर्ष पुराने मंदिर से निकली तीसरी भव्य शाही सवारी, घोड़े पर ध्वजा लिए बालिका बनी आकर्षण का केंद्र; जगह-जगह पुष्पवर्षा, रंगोलियां और पूजा-अर्चना से शिवमय हुआ नगर
नामली / रतलाम। पुलिस दर्पण
नामली, रतलाम। धार्मिक नगरी नामली में दूसरे सावन सोमवार का दिन भक्ति, आस्था और उत्साह से सराबोर रहा। रेलवे स्टेशन क्षेत्र स्थित करीब 75 वर्ष पुराने श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से भगवान श्री नीलकंठेश्वर महादेव की तीसरी भव्य शाही सवारी नगर भ्रमण के लिए निकली। शाम करीब 6 बजे मंदिर से प्रारंभ हुई शाही सवारी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पालकी में विराजमान भगवान नीलकंठेश्वर महादेव के दर्शन के लिए नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे। शाही सवारी जैसे-जैसे नगर के प्रमुख मार्गों से आगे बढ़ी, पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंज उठा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान की पालकी का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
घोड़े पर ध्वजा लिए बालिका बनी आकर्षण का केंद्र
शाही सवारी के आगे हाथों में ध्वजा लिए घोड़े पर सवार बालिका विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक स्वरूप में सजी बालिका के हाथ में लहराती ध्वजा और घोड़े पर उसकी सवारी ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। कई श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को बालिका रूप में मां जगदम्बा की उपस्थिति जैसा भावपूर्ण स्वरूप बताया।
शाही सवारी के आगे ध्वजा लेकर चलती बालिका ने धार्मिक यात्रा की भव्यता को और बढ़ा दिया। नगरवासियों और श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।
पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुई शाही सवारी
शाही सवारी प्रारंभ होने से पहले मंदिर के पुजारी द्वारा श्री नीलकंठेश्वर महादेव तथा मंदिर परिसर में विराजमान वीर श्री हनुमानजी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पालकी में विराजमान भगवान नीलकंठेश्वर महादेव का विशेष पूजन किया गया। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष एवं वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद प्रतिनिधि नरेंद्र सोनावा सहित वरिष्ठ श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर शाही सवारी के सफल आयोजन की कामना की। पूजन के बाद श्रद्धा और जयघोष के बीच शाही सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई।
बारिश बनी बाधा, समिति ने तत्काल संभाली व्यवस्था
सुबह से हो रही बारिश के कारण मंदिर के सामने परिसर में कीचड़ की स्थिति बन गई थी। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर समिति के सदस्यों ने तत्काल व्यवस्था संभाली और दो ट्रॉली चूरी डलवाकर मंदिर परिसर को समतल कराया। समिति के प्रयासों से श्रद्धालुओं को कीचड़ से राहत मिली और शाही सवारी के दौरान आवागमन सुचारु रहा। दोपहर बाद बारिश थम गई, लेकिन इसके बावजूद दिनभर मंदिर में श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहा।
फूलों से सजा मंदिर, विशेष श्रृंगार ने मोहा मन
श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया गया था। भगवान नीलकंठेश्वर महादेव का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। सावन सोमवार होने के कारण सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने पहुंचे।
रंगोलियों और पुष्पवर्षा से सजा शाही सवारी मार्ग
इस वर्ष शाही सवारी के मार्ग में आकर्षक रंगोलियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। मंदिर परिसर से लेकर नगर के विभिन्न मार्गों और प्रमुख चौराहों तक श्रद्धालुओं एवं रहवासियों द्वारा रंगोलियां सजाई गईं।
शाही सवारी जब प्रमुख चौराहों और मार्गों से गुजरी तो कई स्थानों पर पालकी को रोककर श्रद्धालुओं ने भगवान नीलकंठेश्वर महादेव के दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का अभिनंदन किया और पूजा-अर्चना की।
ढोल-बैंड और डीजे पर गूंजे महादेव के भजन
शाही सवारी में ढोल-बैंड और डीजे पर गूंजते महादेव के भजनों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। महिलाएं, बच्चे, बालिकाएं और युवा बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल हुए। महादेव के भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। जगह-जगह हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया। बच्चों से जुड़े आकर्षक विशाल पुतलों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। बच्चों और उनके परिजनों ने पुतलों के साथ सेल्फी लेकर इस धार्मिक आयोजन की यादें अपने मोबाइल कैमरों में संजोईं।
श्रद्धालुओं को बांटी ठंडाई की प्रसादी
शाही सवारी के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर सेवा व्यवस्था भी की गई। श्रद्धालुओं को ठंडाई की प्रसादी वितरित की गई। भगवान के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
इसी दौरान आदिनाथ महादेव की विशाल प्रतिमा के भी श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। धार्मिक आयोजन के दौरान सेवा और सहयोग की भावना भी देखने को मिली।
मंदिर को लेकर पूर्व में उठते रहे सवाल, अब विकास की उम्मीद
श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि नामली की पुरानी पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार, विकास कार्यों, संपत्ति और परिसर के उपयोग को लेकर पूर्व में सार्वजनिक स्तर पर सवाल और चर्चाएं सामने आती रही हैं। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष नरेंद्र सोनावा के कार्यकाल के दौरान मंदिर परिसर में बाउंड्रीवाल, मुख्य द्वार, पुजारी कक्ष सहित अन्य निर्माण कार्य किए गए थे। हालांकि वर्तमान नगर परिषद के कार्यकाल में मंदिर के जीर्णोद्धार और व्यापक विकास को लेकर अपेक्षित पहल नहीं होने की चर्चा क्षेत्र में होती रही है।
वर्तमान में पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष नरेंद्र सोनावा वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद प्रतिनिधि हैं और उनकी धर्मपत्नी पार्षद हैं। ऐसे में क्षेत्रीय रहवासियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर सहित क्षेत्र के दोनों पुराने मंदिरों के जीर्णोद्धार और आवश्यक विकास कार्यों को गति मिल सकती है। मंदिर के विकास और संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। अब तीसरी भव्य शाही सवारी के सफल आयोजन के बाद श्रद्धालुओं की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं कि मंदिर परिसर में साफ-सफाई, मूलभूत सुविधाओं, सौंदर्यीकरण, संरक्षण और धार्मिक गरिमा बनाए रखने की दिशा में निरंतर कार्य हो।
तीसरी शाही सवारी में उमड़ा जनसैलाब
श्री नीलकंठेश्वर महादेव समिति द्वारा लगातार तीसरे वर्ष आयोजित की गई शाही सवारी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नगरवासी शामिल हुए। आयोजन की व्यवस्था में समिति के कमलेश कसेरा, मुकेश पटेल, मनोज सिंह राजावत, दीपक पालनपरा, राहुल रघुवंशी, गोपाल पांचाल, किशन सोलंकी, पोपटलाल, मुकेश वर्मा, तनवीर जाट, आनंद दुबे, सतीश कसेरा, निरंजन कसेरा, शिवनारायण महावर, माणकलाल महावर, रघुनाथ रेगीवार, राधेश्याम सोलंकी, विशाल सोलंकी, दिनेश पांचाल, पवन जायसवाल, योगेश सोनावा, बाबूलाल राठौड़, जितेंद्र डोडिया, चेतन कुमावत, नानकदास बैरागी, रवि कुमावत, दीपक पाल, दिनेश राठौड़ सहित अनेक सदस्य जुटे रहे। शाही सवारी रवाना होने से पहले नरेंद्र सोनावा, विष्णुलाल गुनमणिया, घनश्याम परमार, कृष्णा पांचाल, मोतीलाल हिरिया एवं श्रीनाथ योगी सहित वरिष्ठ श्रद्धालुओं ने पालकी में विराजमान भगवान नीलकंठेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की।
भक्ति, परंपरा और जनभागीदारी का यादगार दृश्य
शाही सवारी के दौरान नामली की गलियों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, जगह-जगह बनी आकर्षक रंगोलियां, पुष्पवर्षा, ढोल-बैंड की गूंज और महादेव के जयकारों ने पूरे नगर को शिवमय कर दिया। तीसरी शाही सवारी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पूर्व की चर्चाओं और विवादों से परे श्री नीलकंठेश्वर महादेव नामली की जनता की गहरी आस्था और श्रद्धा का केंद्र हैं। आयोजन में उमड़ी भीड़ ने धार्मिक परंपरा के प्रति नगरवासियों की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया। श्रद्धालुओं की अब यही अपेक्षा है कि शाही सवारी जैसी धार्मिक परंपराएं निरंतर आगे बढ़ें और इसके साथ ही मंदिर के संरक्षण, जीर्णोद्धार, स्वच्छता, सौंदर्यीकरण तथा मूलभूत सुविधाओं के विकास को भी गति मिले, ताकि करीब 75 वर्ष पुराने इस धार्मिक स्थल की गरिमा आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहे।

