देवीनाथ लोखंडे सह संपादक दक्षिण मध्यप्रदेश
भीमपुर / देसली (बैतूल) – वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या आश्रम देसली की अधीक्षिका सुशीला गुलबाके पर एक निजी पोर्टल द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की संवाददाता ने पड़ताल की तो पूरी कहानी ही झूठी निकली।
पोर्टल ने खबर चलाई थी कि अधीक्षिका शाम होते ही नशे में रहती है और 12 वर्ष की तीन छात्राएं 24 घंटे तक गायब रही।
सच्चाई क्या है? – दस्तावेजी प्रमाण
हमारे पास आश्रम के रजिस्टर से प्राप्त तीनों छात्राओं के स्वयं के हस्तलिखित छुट्टी आवेदन मौजूद हैं:
- कुमारी दुर्गावती काजले (कक्षा 8 वीं) ने 06/09/2026 से 07/09/2026 तक आवश्यक कार्य हेतु दामजीपुरा जाने के लिए लिखित छुट्टी ली।
- कुमारी अनुसूइया इवने (कक्षा 8 वीं) ने भी परिजनों के कहने पर 2 दिन की छुट्टी ली।
- कुमारी सावित्री धुर्वे (कक्षा 6 वीं) ने भी दामजीपुरा में जरूरी काम से जाने हेतु आवेदन दिया था।
तीनों आवेदन “सेवा में श्रीमान अधीक्षिका मैडम जी, देसली” के नाम से विधिवत लिखे गए हैं। यानी छात्राएं अधीक्षिका की अनुमति से ही गई थीं, गायब नहीं हुई थीं।
अधीक्षिका का वर्जन ही सही निकला:
खबर में खुद अधीक्षिका सुशीला गुलबाके का वर्जन दिया गया था कि “छात्राएं आश्रम में ही हैं, कुछ जरूरी tv सामान लेने दामजीपुरा गई थीं, बस न मिलने के कारण रात में वहीं रुक गई थी।” यही बात दस्तावेजों से भी सिद्ध हो रही है।
नशे वाला आरोप भी बेबुनियाद:
15 वर्षों से विभाग में ईमानदारी से सेवा दे रही अधीक्षिका पर शराब का आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाया गया है। स्थानीय लोगों और छात्राओं के परिजनों ने भी इस आरोप को नकारा है। अधीक्षिका विगत 2 वर्षों से देसली आश्रम को अच्छे से संभाल रही हैं।

