करोपानी जमीन विवाद में पीड़ित परिवार का आरोप—नहीं पहुंचा कोई अधिकारी, न्याय की मांग को लेकर आंदोलन जारी
देवीनाथ लोखंडे सह संपादक दक्षिण मध्यप्रदेश
आमला/बोरदेही। ग्राम करोपानी में पुश्तैनी जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करने लगा है। खसरा नंबर 33/5 की 2.382 हेक्टेयर जमीन से बेदखली की कार्रवाई के विरोध में पीड़ित परिवार द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचकर परिवार से मिलने नहीं पहुंचा, ऐसा पीड़ितों का आरोप है। इससे आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
परिवार का दावा है कि विवादित जमीन पर उनके पूर्वजों के समय से चार पीढ़ियों का कब्जा है और मौके पर मकान भी बना हुआ है। इसके बावजूद उन्हें जमीन से बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। परिवार ने राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी कर जमीन अन्य लोगों के नाम दर्ज किए जाने का भी आरोप लगाया है।
कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी बेदखली की कार्रवाई?
पीड़ित परिवार के अनुसार सूरजलाल, गुरुदयाल, मनहोरी यदुवंशी सहित करीब 10 ग्रामीणों ने आमला न्यायालय में स्वत्व की घोषणा एवं स्थाई निषेधाज्ञा के लिए सिविल वाद दायर किया है। परिवार का कहना है कि स्वामित्व का विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद राजस्व स्तर पर बेदखली की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
यही सवाल अब आंदोलन की सबसे बड़ी वजह बन गया है कि जब जमीन के अधिकार को लेकर न्यायालय में विवाद चल रहा है, तो राजस्व कार्रवाई की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है?
सीमांकन रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
परिवार ने 15 दिसंबर 2025 की सीमांकन रिपोर्ट और पंचनामा को भी सवालों के घेरे में लिया है। आरोप है कि उन्हें उचित सूचना दिए बिना और उनकी मौजूदगी तथा हस्ताक्षर के बगैर रिपोर्ट तैयार कर दी गई। पीड़ितों ने पटवारी और राजस्व निरीक्षक पर मौके की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन किए बिना एकपक्षीय रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया है।
बेदखली आदेश के खिलाफ एसडीएम में चुनौती
पीड़ितों का कहना है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर नायब तहसीलदार बोरदेही द्वारा बेदखली के आदेश जारी किए गए, जिन्हें उन्होंने एसडीएम के समक्ष चुनौती दी है। परिवार की मांग है कि जब तक पूरे मामले के दस्तावेजों और मौके की स्थिति की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
24 घंटे बाद भी अधिकारी नहीं पहुंचे, कौन सुनेगा फरियाद?
सबसे गंभीर सवाल अब प्रशासन की संवेदनशीलता को लेकर उठ रहा है। एक परिवार 24 घंटे से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठा है, लेकिन आंदोलनकारियों के अनुसार अभी तक कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा। क्या प्रशासन किसी अप्रिय स्थिति का इंतजार कर रहा है? क्या भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की फरियाद सुनने के लिए किसी अधिकारी के पास समय नहीं है?
परिवार ने राजनीतिक दबाव में कथित रूप से गैर-जमानती धाराओं में फर्जी प्रकरण दर्ज कराने और बार-बार नोटिस देकर मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
“न्याय नहीं मिला तो आंदोलन जारी रहेगा”
पीड़ित परिवार ने राजस्व रिकॉर्ड, पुराने दस्तावेज, सीमांकन रिपोर्ट, पंचनामा और मौके की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि न्याय मिलने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी।
अब पूरे मामले में प्रशासन की अगली भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सवाल सिर्फ जमीन के विवाद का नहीं, बल्कि यह भी है कि 24 घंटे से भूख हड़ताल पर बैठे परिवार की सुध लेने आखिर प्रशासन कब पहुंचेगा?

