ऑपरेशन मेट्रिक्स 2.0: नीमच पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का किया पर्दाफाश

शेयर ट्रेडिंग में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों को बनाते थे शिकार, चार आरोपी गिरफ्तार

62 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक, 8 चेकबुक, 8 मोबाइल, लैपटॉप, मैकबुक और ₹51,500 नकद सहित वाहन जब्त

नीमच, 21 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश पुलिस ने साइबर अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन मेट्रिक्स 2.0’ के तहत नीमच में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से विभिन्न बैंकों के 62 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक, 8 चेकबुक, 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक मैकबुक, एक एटीएम स्वैप मशीन, एक हुंडई ऑरा कार और ₹51,500 नकद जब्त किए गए हैं।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक नीमच राजेश व्यास के निर्देशन में नीमच सिटी थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने की।

I4C से मिले डेटा के आधार पर कार्रवाई

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) से प्राप्त संदिग्ध म्यूल बैंक खातों और एटीएम से नकदी निकासी संबंधी डेटा के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। तकनीकी जानकारी और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर विभिन्न बैंक खातों से जुड़े एटीएम निकासी स्थलों का विश्लेषण किया गया। इसके बाद बैंक और एटीएम बूथ के आसपास संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य अपने और अन्य लोगों के बैंक खातों की किट—एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक सहित—दूसरे आरोपियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को स्थानांतरित करने और निकालने के लिए किया जा रहा था।

फर्जी वेबसाइट से देते थे ठगी को अंजाम

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ‘moneygrow.live’ नामक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। फोन कॉल के माध्यम से शेयर बाजार में बेहतर ट्रेडिंग टिप्स देने और कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। इसके बाद उनसे रकम गिरोह द्वारा उपलब्ध कराए गए म्यूल बैंक खातों में जमा कराई जाती थी।

आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज

इस मामले में नीमच सिटी थाने में आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना की जा रही है। जब्त बैंक खातों, एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक की भी विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन का पता लगाया जा सके।

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