जलभराव से सोयाबीन का बीज सड़ा, किसान दूसरी बार कर रहे बुवाई; सर्वे, मुआवजे और बीज सहायता की उठी मांग
नामली (रतलाम) | पुलिस दर्पण
रतलाम । लगातार हो रही बारिश और खेतों में जलभराव ने नामली क्षेत्र के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सोयाबीन की पहली बुवाई कई स्थानों पर पूरी तरह प्रभावित होने से बड़ी संख्या में किसान दूसरी बार खेतों में बीज डालने को मजबूर हो गए हैं। इससे खेती की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है और किसानों की आर्थिक चिंता भी बढ़ गई है।
नामली सेवा संस्थान के ग्राम सेवक मनीष मईड़ा ने बताया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान दोबारा बुवाई कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि कितने प्रतिशत क्षेत्र में फसल खराब हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से पुष्टि के बाद ही बताई जा सकेगी।
किसान विजय आटेडिया ने बताया कि किसानों ने पहले चरण में 12 से 15 हजार रुपये मूल्य का सोयाबीन बीज खरीदकर बुवाई की थी, लेकिन लगातार बारिश और जलभराव के कारण अधिकांश बीज खराब हो गया। अब किसानों को दूसरी बार बीज खरीदकर बुवाई करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया है।
वहीं किसान बापू सिंह सोलंकी ने बताया कि उन्हें अपनी 20 बीघा भूमि में दोबारा बुवाई करनी पड़ी। लगातार बारिश के कारण पहली फसल खराब होने से उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
किसान संजय जाट ने बताया कि उनकी 50 बीघा कृषि भूमि में से 20 बीघा में दोबारा सोयाबीन की बुवाई करनी पड़ी। नई बुवाई के लिए बीज, डीजल, ट्रैक्टर, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर करीब 65 से 70 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आया है। उनका कहना है कि इस अप्रत्याशित खर्च ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाला है।
क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी बताया कि लगातार बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण पहले बोया गया बीज सड़ गया या उसका अंकुरण नहीं हो सका। दूसरी ओर, बाजार में गुणवत्तायुक्त बीज की कमी से परेशानी और बढ़ गई है। कई किसानों को महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है, जबकि कुछ किसान अभी भी बीज उपलब्ध होने का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक खेतों में जलभराव रहने से सोयाबीन का अंकुरण प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में दोबारा बुवाई करनी पड़ती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ उपज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। किसानों ने शासन और कृषि विभाग से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए, वास्तविक नुकसान का आकलन कर किसानों को आर्थिक सहायता, गुणवत्तायुक्त बीज और उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। फिलहाल नामली क्षेत्र का किसान मौसम के अनुकूल होने और अच्छी उपज की उम्मीद के साथ दोबारा खेतों में मेहनत कर रहा है।


