हैदराबाद और कर्नाटक से पकड़े गए आरोपी, पुलिस ने करीब 20 लाख रुपये कराए होल्ड
रतलाम, 12 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश के रतलाम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 55 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। थाना माणकचौक और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने ठगी की रकम में से करीब 20 लाख रुपये संबंधित बैंक खातों में होल्ड कराने में सफलता हासिल की है।
मुंबई पुलिस और ATS अधिकारी बनकर डराया
पुलिस के अनुसार, फरियादी कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करते हैं और वर्तमान में रतलाम में रह रहे थे। 15 सितंबर को उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने स्वयं को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। मोबाइल नंबर के कथित आपराधिक इस्तेमाल और पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़े व्यक्ति से बातचीत का आरोप लगाकर उन्हें भयभीत किया गया।
इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग नंबरों से संपर्क कर FIR दर्ज होने की बात कही। अगले दिन वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने व्यक्तियों से बात कराई गई और सुप्रीम कोर्ट के लेटरहेड पर तैयार फर्जी दस्तावेज भेजे गए।
जांच और सत्यापन के नाम पर ऐंठे 55 लाख रुपये
आरोपियों ने कानूनी कार्रवाई से बचने और सत्यापन के नाम पर बैंक खातों में रकम जमा कराने को कहा। पूरी राशि वापस लौटाने का भरोसा देकर RTGS के माध्यम से कुल 55 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत के बाद माणकचौक थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
हैदराबाद और धारवाड़ से गिरफ्तारी
बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों को हैदराबाद तथा एक आरोपी को कर्नाटक के धारवाड़ से गिरफ्तार किया। जांच में एक खाते में 35 लाख रुपये और दूसरे स्तर के खाते में पांच लाख रुपये ट्रांसफर होने की जानकारी मिली। पुलिस ने करीब 20 लाख रुपये होल्ड कराए हैं। अन्य संभावित आरोपियों और शेष रकम के संबंध में जांच जारी है।
पुलिस की नागरिकों से अपील
मध्यप्रदेश पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसे जमा कराने को कहती है। ऐसी कॉल आने पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें और तुरंत कॉल काट दें। साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन 1930 या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

