रतलाम | पुलिस दर्पण
रतलाम रेलवे स्टेशन पर मानवता को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। एक नवजात बच्ची ट्रेन के एस-2 स्लीपर कोच में लावारिस हालत में मिली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ट्रेन इंदौर से सुबह रवाना होकर करीब 10 बजे रतलाम पहुंचती है और यार्ड में खड़ी की जाती है। शाम को प्लेटफॉर्म पर लाने के बाद जब ट्रेन के रवाना होने की तैयारी हो रही थी, तब सीट पर कपड़े में लिपटी नवजात बच्ची मिलने से हड़कंप मच गया।
पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि किसी व्यक्ति ने यात्रियों के चढ़ने से पहले बच्ची को कोच में छोड़ दिया होगा। बताया जा रहा है कि संबंधित स्लीपर कोच के गेट बंद थे, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि कोई व्यक्ति दूसरे कोच के रास्ते एस-2 तक पहुंचा और बच्ची को सीट पर छोड़कर चला गया।
जीआरपी थाना प्रभारी सोहन पाटीदार ने बताया कि रेलवे स्टेशन और प्लेटफॉर्म पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि बच्ची को छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
दृष्टिकोण…..✍🏽
“मां की ममता नहीं रोई होगी… यह कैसी मजबूरी या कैसी निर्दयता रही होगी कि एक मासूम नवजात को यूं लावारिस छोड़ दिया गया?”
यह प्रश्न हर संवेदनशील मन को विचलित करता है। हालांकि, जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी व्यक्ति—विशेषकर मां—पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यह भी संभव है कि घटना के पीछे ऐसी परिस्थितियां हों, जिनका अभी खुलासा न हुआ हो। फिर भी, ऐसी घटनाएं समाज को आत्ममंथन करने पर मजबूर करती हैं। एक ओर भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर नवजात बच्चों को लावारिस छोड़ने जैसी घटनाएं सामाजिक संवेदनाओं, पारिवारिक सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्ची सुरक्षित है और पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

