आरटीआई में सामने आया 50 साल पुराने केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण रिकॉर्ड, 1000 से अधिक बच्चों की सुरक्षा का सवाल
वर्ष 1975 में निर्माण और 1976 में संचालन की जानकारी, अब नींव से छत तक तकनीकी जांच की मांग
देवीनाथ लोखंडे सह संपादक दक्षिण मध्यप्रदेश
सारनी, बैतूल। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में केंद्रीय विद्यालय सारनी के करीब 50 वर्ष पुराने भवन के निर्माण और विद्यालय संचालन से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। वर्ष 1975 में भवन निर्माण तथा वर्ष 1976 में विद्यालय का संचालन शुरू होने की जानकारी सामने आने के बाद भवन की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति को लेकर विशेष तकनीकी जांच की मांग उठी है। वर्तमान में इस भवन में 1000 से अधिक विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने की बात कही गई है।
आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार विद्यालय भवन के निर्माण से संबंधित पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध होने अथवा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति भी सामने आई है। वहीं वर्ष 1976 में केंद्रीय विद्यालय के प्रारंभ होने संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने की जानकारी है। करीब पांच दशक पुराने भवन के मामले में अब यह मांग उठ रही है कि भवन की वर्तमान मजबूती का विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाए।
नींव से छत तक हो विशेष तकनीकी जांच
जिला प्रशासन से मांग की गई है कि लोक निर्माण विभाग अथवा सक्षम तकनीकी विशेषज्ञों की समिति गठित कर भवन की नींव, बीम, कॉलम, छत और दीवारों की विस्तृत संरचनात्मक जांच कराई जाए। साथ ही भवन की भार वहन क्षमता और वर्तमान स्थिति की तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाए।
असुरक्षित मिला तो हो वैकल्पिक व्यवस्था
तकनीकी जांच में यदि भवन विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो तत्काल वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है। आवश्यकता के अनुसार नए केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी सामने आई है।
आरटीआई ने खोला पुरानी इमारत से जुड़ा रिकॉर्ड
आरटीआई के माध्यम से सामने आई निर्माण अवधि की जानकारी ने करीब पांच दशक पुराने विद्यालय भवन की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब पूरे मामले में मुख्य सवाल भवन की उम्र से अधिक उसकी वर्तमान संरचनात्मक मजबूती का है। तकनीकी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भवन वर्तमान समय में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है अथवा उसमें सुधार, मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है।
1000 से अधिक विद्यार्थियों से जुड़े इस मामले में प्रशासन द्वारा तकनीकी जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने से भवन की वास्तविक स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

