कई स्थानों पर पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, तेजाजी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद दाल-बाटी का भोग, प्रसादी और महाआरती में उमड़ा जनसैलाब
नामली/रतलाम । पुलिस दर्पण
नामली/रतलाम । श्री सत्यवीर तेजाजी महाराज के निर्माण दिवस के रूप में मनाई जाने वाली तेजा दशमी का पर्व सोमवार को नामली नगर में धार्मिक उल्लास, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। नगर के श्री तेजाजी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। संपूर्ण जाट समाज के लोगों ने मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा भगवान तेजाजी महाराज को चूरमा-बाटी का भोग अर्पित किया।
दोपहर करीब 12 बजे तेजाजी मंदिर से भव्य निशान यात्रा का शुभारंभ हुआ। बैंड-बाजों और डीजे की धार्मिक धुनों के बीच निकली इस यात्रा में 15 से अधिक छत्रियों के निशान शामिल रहे। यात्रा में श्री बजरंग व्यायामशाला के सैकड़ों बालक-बालिकाओं और कलाकारों ने भाग लेकर विभिन्न प्रकार के हैरतअंगेज एवं आकर्षक करतब प्रस्तुत किए। अखाड़े के कलाकारों के प्रदर्शन ने मार्ग में मौजूद लोगों को खासा आकर्षित किया और जगह-जगह लोगों की भीड़ देखने को मिली।
इन प्रमुख मार्गों से निकली निशान यात्रा
निशान यात्रा श्री तेजाजी मंदिर से प्रारंभ होकर जाट मोहल्ला, अयोध्या बस्ती, जावरा रोड, सेमलिया रोड, पुराना बस स्टैंड, सब्जी मंडी, होली चौक, द्वारकाधीश मंदिर, पैलेस रोड सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः तेजाजी मंदिर पहुंची। यात्रा का नगर में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। जगह-जगह श्रद्धालुओं को दूध एवं प्रसादी का वितरण भी किया गया। यात्रा के दौरान पूरा नगर धार्मिक जयघोष से गूंजता रहा।
तेजाजी स्थल पर निभाई गई आस्था से जुड़ी परंपरा
निशान यात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद तेजाजी मंदिर स्थल पर धार्मिक आयोजन हुआ। मान्यता के अनुसार सर्पदंश अथवा जीव-जंतुओं के काटने से पीड़ित लोगों को तेजाजी महाराज के नाम से धागा बांधा गया। इसके साथ ही अभिमंत्रित जल का छिड़काव किया गया तथा धागों को तेजाजी मंदिर स्थल पर छोड़ा गया।इसके पश्चात महाआरती का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाआरती में शामिल होकर सत्यवीर तेजाजी महाराज के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।
सिर्फ जाट समाज ही नहीं, अन्य समाजों की भी रही सहभागिता
श्री तेजा दशमी के अवसर पर नगर में आस्था और सामाजिक समरसता का विशेष वातावरण देखने को मिला। जाट समाज के साथ ही नगर के विभिन्न समाजों के लोगों ने भी तेजाजी मंदिर पहुंचकर श्रीफल, पुष्प एवं हार अर्पित किए तथा सत्यवीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
धार नहीं चलाने की परंपरा, बाजार में भी दिखा असर
श्री तेजा दशमी के दिन स्थानीय परंपरा के अनुसार धार चलाना निषेध माना जाता है। इसका असर नगर के जनजीवन और व्यवसायिक गतिविधियों में भी दिखाई दिया। कृषि कार्यों के साथ-साथ कई व्यवसाय एवं दुकानें बंद रहीं। होटल, टेलर, मिस्त्री, सुथार, लोहार तथा दाढ़ी-कटिंग की दुकानों सहित अन्य प्रतिष्ठानों में भी इस परंपरा का पालन किया गया। नगर के कई परिवारों ने भी इस दिन घरों में सब्जी के स्थान पर दाल-बाती बनाकर भोजन किया। इस प्रकार श्री तेजा दशमी का पर्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नगर की सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा दिखाई दिया। दिनभर तेजाजी मंदिर और यात्रा मार्ग पर श्रद्धा का वातावरण बना रहा। भक्ति, परंपरा, सामाजिक सहभागिता और अखाड़े के कलाकारों के प्रदर्शन ने तेजा दशमी पर्व को नगर में विशेष आकर्षण का केंद्र बना दिया।

