तकनीक और मैदानी कार्रवाई से बालाघाट में सर्राफा लूट का खुलासा, अंतर्राज्यीय गैंग के 3 सदस्य गिरफ्तार

22 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण बरामद, 65 दिनों तक 5 राज्यों के 21 जिलों में चली तलाश

भोपाल, 8 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मैदानी सूचना तंत्र और अंतर्राज्यीय समन्वय के जरिए बालाघाट जिले में सर्राफा व्यापारियों से हुई लूट की दो वारदातों का खुलासा किया है। पुलिस ने अंतर्राज्यीय ‘ऐरागोल्ला गैंग’ के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दोनों घटनाओं में लूटे गए करीब 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं।

14 पुलिस टीमों ने 22,270 किलोमीटर की यात्रा की

पुलिस अधीक्षक बालाघाट के निर्देशन में गठित विशेष टीमों ने 5 अगस्त से 8 अक्टूबर 2026 तक करीब 65 दिनों तक लगातार अभियान चलाया। इस दौरान 14 पुलिस टीमों ने मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के 21 जिलों में आरोपियों की तलाश की और लगभग 22,270 किलोमीटर की सड़क यात्रा तय की।

अभियान में 76 पुलिसकर्मियों ने कुल 149 दिवस मैदानी कार्य किया। पुलिस ने करीब 190 लोगों से पूछताछ की और विभिन्न राज्यों की छह जेलों में निरुद्ध आरोपियों से भी जानकारी जुटाई।

6.24 लाख टेलीफोन रिकॉर्ड और 300 से अधिक कैमरों की जांच

जांच में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया गया। साइबर सेल ने करीब 6,24,588 टेलीफोन रिकॉर्ड का तकनीकी विश्लेषण किया। इसके साथ ही 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच कर आरोपियों की आवाजाही की कड़ियां जोड़ी गईं।

रजेगांव से रायपुर, ओडिशा, संबलपुर और महासमुंद तक विभिन्न स्थानों के सीसीटीवी फुटेज का समय-क्रम के आधार पर मिलान किया गया। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की गतिविधियों, सोशल मीडिया और अन्य तकनीकी सूचनाओं को जोड़कर पुलिस टीमों को महत्वपूर्ण सुराग मिले।

रेकी कर सर्राफा व्यापारियों को बनाया निशाना

पहली वारदात 5 अगस्त 2026 को किरनापुर थाना क्षेत्र के रजेगांव में हुई। सर्राफा व्यापारी दुकान बंद कर सोने-चांदी के आभूषण और अन्य सामान से भरे दो बैग लेकर घर जा रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार आरोपियों ने रास्ता रोककर दोनों बैग लूट लिए।

दूसरी घटना 28 अगस्त 2026 को लांजी थाना क्षेत्र में हुई। दुकान बंद कर आभूषण और नकदी लेकर घर लौट रहे सर्राफा व्यापारी की मोटरसाइकिल आरोपियों ने रोक दी। मारपीट के बाद आरोपी आभूषण और नकदी से भरे दोनों थैले लेकर फरार हो गए।

पहचान छिपाने के लिए अपनाते थे कई तरीके

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य वारदात से पहले सर्राफा व्यापारियों की गतिविधियों की रेकी करते थे। आरोपी बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करते थे। पहचान छिपाने के लिए हेलमेट पहनने, कपड़े बदलने और रास्ते में मोटरसाइकिल बदलने जैसी सावधानियां बरती जाती थीं।

वारदात के बाद आरोपी तत्काल दूरस्थ और सुरक्षित स्थानों की ओर रवाना हो जाते थे। डिजिटल पहचान से बचने के लिए वे व्यक्तिगत सिम और नियमित मोबाइल हैंडसेट का भी सीमित उपयोग करते थे।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा में दबिश देकर गिरफ्तारी

तकनीकी एवं मैदानी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीमों ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में दबिश देकर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों की बालाघाट की दोनों लूट की घटनाओं में संलिप्तता सामने आई है। पुलिस अब अन्य राज्यों में इसी तरह की वारदातों के संबंध में भी आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

बालाघाट पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि संगठित एवं अंतर्राज्यीय अपराधों के खिलाफ तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी निगरानी, साइबर जांच और मैदानी सूचना तंत्र को एक साथ इस्तेमाल कर अपराधियों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

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