सीजर डिलीवरी और बेहतर इलाज का झांसा देकर QR कोड से मंगवाता था रुपये, बैतूल के अलावा भोपाल और इंदौर में भी सामने आए मामले
देवीनाथ लोखंडे सह संपादक दक्षिण मध्यप्रदेश बैतूल
बैतूल। जिला अस्पताल में प्रसव और सीजर डिलीवरी के दौरान बेहतर इलाज कराने का झांसा देकर मरीजों के परिजनों से ऑनलाइन ठगी करने का मामला सामने आया है। खुद को डॉक्टर बताकर फोन करने वाला आरोपी ऑपरेशन और बेहतर उपचार के नाम पर परिजनों से रुपये मांगता था। इसके लिए वह मोबाइल पर QR कोड भेजकर UPI के माध्यम से रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवाता था। कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ इंदौर और भोपाल में भी इसी तरह की धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं।
सीजर ऑपरेशन के नाम पर मांगे 5 हजार रुपये
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को मंडई खुर्द निवासी विजय नागले ने अपनी पत्नी मीरा नागले को प्रसव के लिए जिला अस्पताल बैतूल के महिला वार्ड में भर्ती कराया था। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद महिला को सीजर डिलीवरी के लिए ऑपरेशन वार्ड में ले जाया गया। इसी दौरान फरियादी के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को डॉक्टर बताते हुए सीजर ऑपरेशन अच्छी तरह करने और टांके ठीक से लगाने का भरोसा दिया। इसके बदले उसने 5 हजार रुपये मांगे और QR कोड भेजकर ऑनलाइन भुगतान करने को कहा।
फरियादी के पास कीपैड मोबाइल होने के कारण उसने अपने भाई संजय नागले को इसकी जानकारी दी। इसके बाद संजय ने आरोपी से बातचीत कर उसके भेजे गए QR कोड पर फोन-पे के माध्यम से 5 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
अन्य मरीजों के परिजनों को भी बनाया निशाना
पुलिस के मुताबिक, इसी तरह जिला अस्पताल में भर्ती रेसु आरसे के परिजनों से बेहतर डिलीवरी कराने के नाम पर 5 हजार रुपये मांगे गए, जिनमें से 3 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। इससे पहले 14 अक्टूबर को प्रसव के लिए भर्ती कविता पिपरदे के परिजनों से भी सीजर डिलीवरी अच्छी तरह कराने के नाम पर 6 हजार रुपये मांगे गए थे। इनमें से 3 हजार रुपये ऑनलाइन भुगतान किए गए।
इसके अलावा एक अन्य मामले में बच्चे के गले में नाल फंसने के कारण हमीदिया अस्पताल भोपाल रेफर किए जाने के बाद इलाज के नाम पर 24 हजार रुपये की धोखाधड़ी किए जाने की शिकायत भी सामने आई। इस संबंध में कोतवाली थाने में अलग से प्रकरण दर्ज किया गया है।
तकनीकी साक्ष्यों से हुई आरोपी की पहचान
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपुसे और एसडीओपी बैतूल अन्नपूर्णा सिरसाम के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। फरियादी की रिपोर्ट पर 22 अक्टूबर 2026 को कोतवाली थाने में अपराध क्रमांक 911/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल नंबरों की जांच के आधार पर आरोपी की पहचान जितेंद्र खाकरे (30), पिता दीनदयाल खाकरे, निवासी ग्राम खापा, थाना आठनेर, जिला बैतूल के रूप में की। तलाश के दौरान पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों पर दबिश दी और 27 अक्टूबर को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
भोपाल और इंदौर में भी दर्ज हैं मामले
पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ अन्य जिलों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।
इंदौर: थाना संयोगितागंज में वर्ष 2025 में दर्ज अपराध क्रमांक 406/2025 में आरोपी पर एक व्यक्ति से उसकी मां के ऑपरेशन और बेहतर इलाज के नाम पर 8 हजार रुपये लेने का आरोप है। इसके अलावा दो अन्य व्यक्तियों से भी क्रमशः 5 हजार और 9 हजार रुपये ऑनलाइन प्राप्त करने का मामला सामने आया था।
भोपाल: थाना कोहेफिजा में अपराध क्रमांक 66/2026 के तहत दर्ज प्रकरण में आरोपी पर खुद को हमीदिया अस्पताल का डॉक्टर बताकर प्रसव के दौरान बेहतर इलाज के नाम पर एक व्यक्ति से 8 हजार रुपये और अन्य लोगों से भी इसी तरह UPI के माध्यम से रकम लेने के आरोप हैं। इन मामलों के संबंध में संबंधित थानों में दर्ज प्रकरणों के तथ्यों के आधार पर आगे की विवेचना की जा रही है।
अस्पताल में रुपये मांगने वालों से रहें सावधान
पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने आमजन से अपील की है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों, विशेषकर प्रसूता महिलाओं के परिजन किसी अज्ञात व्यक्ति के फोन पर खुद को डॉक्टर या अस्पताल का कर्मचारी बताकर रुपये मांगने पर तुरंत विश्वास न करें। ऑपरेशन, सीजर डिलीवरी या बेहतर इलाज के नाम पर भेजे गए QR कोड पर बिना सत्यापन के भुगतान न करें।
उपचार के नाम पर भुगतान की मांग होने पर संबंधित डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन से सीधे पुष्टि करें। ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।
इस कार्रवाई में कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक देवकरण डेहरिया, उपनिरीक्षक छत्रपाल धुर्वे, रणधीर सिंह राजपूत, प्रधान आरक्षक दीपक कटियार, तरुण पटेल, शिवकुमार उइके सहित पुलिसकर्मियों और साइबर सेल के कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

