पांच बड़े मेडिकल कॉलेजों में करोड़ों की मशीनें, फिर भी बच्चों की MRI में अड़चन
भोपाल। मध्य प्रदेश के पांच बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से MRI और CT स्कैन मशीनें स्थापित हैं। इन मशीनों से सामान्य मरीजों की जांच नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन छोटे बच्चों और गंभीर मरीजों के लिए MRI जांच की सुविधा पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसका मुख्य कारण MRI के दौरान मरीज को बेहोश करने के लिए जरूरी विशेष एनेस्थीसिया उपकरणों का अभाव बताया जा रहा है।
एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन नहीं होने से परेशानी
छोटे बच्चों और गंभीर मरीजों को कई बार MRI जांच के दौरान स्थिर रखने के लिए बेहोश करना पड़ता है। इसके लिए MRI कक्ष में विशेष एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, मॉनिटर और सिरिंज पंप की जरूरत होती है। इन उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण ऐसे मरीजों की जांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नहीं हो पा रही है।
35 से 50 लाख रुपये में पूरा सेटअप
जानकारी के अनुसार, MRI के लिए आवश्यक एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन और संबंधित मॉनिटरिंग उपकरणों का पूरा सेटअप करीब 35 से 50 लाख रुपये की लागत में तैयार हो सकता है। उपकरण नहीं होने के कारण मरीजों को MRI जांच के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
MRI में सामान्य उपकरणों का इस्तेमाल संभव नहीं
MRI मशीन के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के कारण सामान्य एनेस्थीसिया उपकरणों का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं माना जाता। विशेष रूप से MRI के अनुकूल उपकरणों की आवश्यकता होती है। इनके जरिए मरीज को ऑक्सीजन और एनेस्थीसिया देने के साथ उसकी हार्टबीट, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर पर लगातार निगरानी रखी जाती है।
मेडिकल एजुकेशन विभाग से जवाब का इंतजार
मामले में मेडिकल एजुकेशन विभाग का पक्ष जानने के लिए कमिश्नर धनराजू एस. से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका। करोड़ों की मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद आवश्यक सहायक उपकरणों की कमी मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।

