हेलमेट और सीटबेल्ट के इस्तेमाल पर रहेगा जोर, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
भोपाल, 1 अक्टूबर 2026। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेशभर में 10 दिवसीय विशेष प्रवर्तन एवं जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। अभियान 28 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसमें हेलमेट और सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग के साथ नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
प्रमुख चौराहों और ब्लैक स्पॉट पर सघन चेकिंग
अभियान के दौरान जिलों के प्रमुख चौराहों, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों तथा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट पर विशेष चेकिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे। हेलमेट के बिना दोपहिया वाहन चलाने और सीटबेल्ट का उपयोग नहीं करने वाले चारपहिया वाहन चालकों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाली सवारी को भी हेलमेट पहनने के लिए जागरूक किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ITMS और CCTV से होगी निगरानी
जिन शहरों में ITMS और CCTV की सुविधा उपलब्ध है, वहां ANPR तकनीक सहित अन्य तकनीकी माध्यमों से नियमों की निगरानी की जाएगी। उल्लंघन मिलने पर ई-चालान की कार्रवाई की जाएगी। बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन के लिए संबंधित RTO को प्रस्ताव भेजने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
स्कूल-कॉलेजों में भी चलेगा जागरूकता अभियान
पुलिस द्वारा प्रवर्तन कार्रवाई के साथ स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और औद्योगिक संस्थानों में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग एवं पंपलेट के माध्यम से हेलमेट और सीटबेल्ट के महत्व की जानकारी दी जाएगी।
सामाजिक संगठनों को भी अभियान से जोड़ा
अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, NCC, NSS, स्काउट-गाइड, रेडक्रॉस और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पेट्रोल पंप, ऑटोमोबाइल डीलर, ड्राइविंग स्कूल और परिवहन से जुड़े संगठनों के सहयोग से लोगों को नियमित रूप से हेलमेट और सीटबेल्ट इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों के जरिए भी सड़क सुरक्षा संदेशों का व्यापक प्रचार किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल चालानी कार्रवाई नहीं, बल्कि नागरिकों के व्यवहार में सुरक्षित और जिम्मेदार यातायात संस्कृति को बढ़ावा देना है।

