‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ पहल शुरू, पहले चरण में 500 कॉलेजों में होंगी कार्यशालाएं; 22 अक्टूबर से शुरू होगा क्रियान्वयन
भोपाल, 10 अक्टूबर 2026। युवाओं को कानून, मौलिक अधिकारों, नागरिक कर्तव्यों, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस और उच्च शिक्षा विभाग ने संयुक्त पहल ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ शुरू की है। प्रथम चरण में प्रदेश के 500 कॉलेजों में इस कार्यक्रम का संचालन किया जाएगा। कॉलेजों में इसकी शुरुआत 22 अक्टूबर से होगी।
प्राध्यापकों और पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू
कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 10 अक्टूबर से भोपाल स्थित NITTTR में कॉलेज प्राध्यापकों और पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (ToT) शुरू किया गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सहायक प्राध्यापकों, प्राध्यापकों और एनसीसी-एनएसएस प्रभारियों ने भाग लिया।
उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा ने बताया कि युवाओं को कानून और नागरिक जिम्मेदारियों की व्यवस्थित जानकारी देने के लिए आठ क्रेडिट कोर्स तैयार किए गए हैं। प्रशिक्षण के बाद जिला स्तर पर कार्ययोजना बनाकर कॉलेजों में निर्धारित पुस्तिका और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
सामुदायिक पुलिसिंग से मजबूत होगा जनविश्वास
डीआईजी सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि पुलिस और समाज के बीच विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित करने में सामुदायिक पुलिसिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लैंगिक समानता, महिला सुरक्षा, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव जैसे विषयों पर जागरूकता की आवश्यकता बताई।
उन्होंने ‘मैं हूं अभिमन्यु’ अभियान का उल्लेख करते हुए युवाओं और बालकों को लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत विद्यार्थी स्वयंसेवकों और इच्छुक प्राध्यापकों को स्थानीय थानों तथा महिला थानों के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि विद्यार्थी अपनी समस्याएं गोपनीय रूप से साझा कर सकें।
साइबर अपराध से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक होंगे विषय
कार्यशालाओं में संविधान, मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, कानून-व्यवस्था, पुलिस की कार्यप्रणाली, साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, यातायात नियम, सड़क सुरक्षा, नशे के दुष्प्रभाव, जेंडर आधारित हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन जैसे विषय शामिल होंगे।
विद्यार्थियों को साइबर ठगी से बचाव, आपातकालीन सहायता प्राप्त करने के तरीकों और डायल-112 सेवा की जानकारी भी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय पुलिस थानों का भ्रमण कराकर पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर दिया जाएगा।
पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी जोर
पुलिस महानिरीक्षक श्रुचि वर्धन मिश्रा ने हार्टफुलनेस संस्था के साथ हुए एमओयू की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और एकाग्रता बढ़ाने के लिए ध्यान संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उनके अनुसार, प्रत्येक रविवार को थाना स्तर पर ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को भी ध्यान को दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित किया, जिससे एकाग्रता, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन विकसित करने में सहायता मिल सके।
युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाना मुख्य उद्देश्य
एआईजी सामुदायिक पुलिसिंग अमृत मीना ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग पुलिस और आमजन के बीच सेतु का कार्य करती है। प्राध्यापक प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को अपने कॉलेजों में विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगे, जिससे कार्यक्रम को पूरे प्रदेश में एकरूपता के साथ लागू किया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल कानूनों की सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को समझने, सही निर्णय लेने, अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने के लिए सक्षम बनाना है।

