स्लीमनाबाद टनल अंतिम चरण में,6 जिलों के 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा नर्मदा जल

कटनी को मिलेगा पेयजल, किसानों की बढ़ेगी समृद्धि; 1600 करोड़ रुपये की परियोजना से सिंचाई व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम।

कटनी | पुलिस दर्पण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कृषक कल्याण वर्ष के संकल्प के अनुरूप कटनी जिले की बहुप्रतीक्षित स्लीमनाबाद टनल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। करीब डेढ़ दशक से निर्माणाधीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 11.952 किलोमीटर लंबी टनल की खुदाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब केवल 40 मीटर का खनन कार्य शेष है। अधिकारियों के अनुसार यदि तकनीकी स्तर पर कोई बाधा नहीं आई तो 15 जुलाई तक टनल का खनन कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अनुसार यह टनल बरगी व्यपवर्तन परियोजना की दाई तट मुख्य नहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके पूर्ण होने के बाद लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे क्षेत्र की कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
कार्यपालन यंत्री श्री सहज श्रीवास्तव ने बताया कि यह परियोजना किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इसके माध्यम से न केवल कृषि क्षेत्र को पर्याप्त सिंचाई जल मिलेगा, बल्कि कटनी शहर की पेयजल व्यवस्था भी मजबूत होगी। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

इन जिलों को मिलेगा लाभ।

कटनी: 21,823 हेक्टेयर

मैहर: 54,227 हेक्टेयर

सतना: 1,04,970 हेक्टेयर

पन्ना: 448 हेक्टेयर

रीवा: 3,084 हेक्टेयर

साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी परियोजना का लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली दाई तट मुख्य नहर (ट्रांस वैली कैनाल) प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक जल वहन क्षमता वाली नहर होगी। वर्तमान में इस परियोजना की लागत 1600 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। निर्माण कार्य मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यू.यू. (संयुक्त उपक्रम), हैदराबाद द्वारा किया जा रहा है। परियोजना पूर्ण होने के बाद माँ नर्मदा का जल सोन नदी से जुड़ेगा, जिससे मध्यप्रदेश के आधा दर्जन जिलों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा क्षेत्र के आर्थिक और कृषि विकास को नई गति मिलेगी।

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