कक्षा 9वीं की दोस्ती बनी जीवनसाथी का रिश्ता, इंदौर में रचाई शादी… एसडीएम कार्यालय में दिनभर चला पारिवारिक संघर्ष, बेटी के फैसले के बाद परिजनों ने तोड़े सभी रिश्ते।
रतलाम | पुलिस दर्पण
रतलाम। कभी स्कूल की एक मासूम-सी दोस्ती… फिर वक्त के साथ गहराता अपनापन… वर्षों तक दूर रहकर भी एक-दूसरे के लिए धड़कता दिल… परिवारों का विरोध… घर छोड़ने का फैसला… इंदौर में प्रेम विवाह… और आखिरकार शनिवार को रतलाम के एसडीएम कार्यालय में करीब आठ घंटे तक चला ऐसा भावनात्मक घटनाक्रम, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर प्रेम बड़ा है या परिवार?
शनिवार को एसडीएम (ग्रामीण) कार्यालय के भीतर और बाहर सुबह से शाम तक माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। एक ओर युवती के परिजन उसे अपने साथ ले जाने की जिद पर अड़े थे, तो दूसरी ओर युवक को पुलिस सुरक्षा में रखा गया था। दोनों पक्षों के बीच समझाइश, बहस और भावनाओं का दौर घंटों तक चलता रहा।
नौवीं कक्षा की दोस्ती बनी जीवनभर का साथ
जानकारी के अनुसार युवक और युवती की पहली मुलाकात उस समय हुई थी, जब दोनों कक्षा 9वीं में एक ही विद्यालय में पढ़ते थे। दोस्ती धीरे-धीरे विश्वास में बदली और फिर यही रिश्ता प्रेम में बदल गया।
पढ़ाई के लिए दोनों अलग-अलग स्थानों पर गए, लेकिन दूरी भी उनके रिश्ते को कमजोर नहीं कर सकी। महानगर में पढ़ाई के दौरान दोनों लगातार मिलते रहे और वर्षों का यह साथ आखिरकार विवाह के निर्णय तक पहुंच गया।
बताया जाता है कि युवती की उम्र युवक से अधिक है, लेकिन दोनों ने उम्र और समाज की परवाह किए बिना एक-दूसरे को जीवनसाथी चुनने का निर्णय लिया।
परिवार ने किया विरोध, प्रेम ने नहीं मानी हार
जब दोनों ने अपने रिश्ते को विवाह का नाम देने की इच्छा जताई तो युवती के परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया। लेकिन प्रेम अपने फैसले पर अडिग रहा।
आखिरकार दोनों घर छोड़कर इंदौर पहुंचे और वहां विवाह कर लिया। विवाह की जानकारी मिलने के बाद युवती के परिजनों ने विरोध दर्ज कराया और मामला पुलिस तक पहुंच गया।
एसडीएम कार्यालय बना भावनाओं का केंद्र
नए कानूनी प्रावधानों के तहत पुलिस दोनों को एसडीएम के समक्ष लेकर पहुंची। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई प्रक्रिया शाम लगभग 6 बजे तक चली।
इस दौरान दो थानों का पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और दोनों पक्षों के परिजन पूरे समय मौजूद रहे। कार्यालय परिसर में तनाव, भावनाएं और लगातार चल रही चर्चाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
एक फैसला… और बदल गई जिंदगी
घंटों चली प्रक्रिया के बाद युवती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपनी इच्छा से अपने पति के साथ रहना चाहती है।
युवती का यह बयान सामने आते ही परिजनों की भावनाएं उफान पर आ गईं। उन्होंने बेटी के निर्णय को स्वीकार करने से इनकार करते हुए उससे सभी पारिवारिक रिश्ते समाप्त करने की घोषणा कर दी।
रिश्तों से भी लिखित विदाई
परिजनों ने आशंका जताई कि भविष्य में युवती परिवार की संपत्ति या अन्य अधिकारों की मांग कर सकती है। इसके बाद उन्होंने प्रशासन के समक्ष यह मांग रखी कि युवती से लिखित में लिया जाए कि वह भविष्य में परिवार या संपत्ति पर किसी प्रकार का दावा नहीं करेगी।
बताया जाता है कि युवती ने भी लिखित रूप से अपनी बात परिजनों तक पहुंचाई। इसके बाद दिनभर चले घटनाक्रम का समापन हुआ।
प्रेम की कीमत… अपनों से जुदाई
यह घटनाक्रम केवल एक प्रेम विवाह का मामला नहीं था, बल्कि दो पीढ़ियों की सोच, सामाजिक मान्यताओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच खड़े संघर्ष की कहानी भी था।
एक ओर दो प्रेम करने वाले लोग थे, जिन्होंने साथ जीने का निर्णय लिया। दूसरी ओर एक परिवार था, जिसने अपनी बेटी के फैसले के बाद उससे सारे रिश्ते समाप्त करने का कठिन निर्णय लिया।
मोहब्बत ने अपना मुकाम तो पा लिया, लेकिन इसकी कीमत एक बेटी को अपने ही परिवार से जुदाई के रूप में चुकानी पड़ी।
नोट: पुलिस और प्रशासन ने पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए युवती के स्वतंत्र बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की। मामले में युवती ने अपनी इच्छा से पति के साथ रहने का निर्णय व्यक्त किया।


