6 किलोमीटर पैदल चलकर शिवगढ़ वन क्षेत्र पहुंचे कलेक्टर अजय कटेसरिया, 859 हेक्टेयर में विकसित हो रहे सघन वन का किया निरीक्षण
रतलाम/सैलाना। पुलिस दर्पण
रतलाम/सैलाना। सैलाना प्रवास के दौरान कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित किए जा रहे सघन वन एवं जल संरक्षण कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। कलेक्टर ने करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर वन क्षेत्र का भ्रमण किया और पौधरोपण, पौधों के रखरखाव, जल संरक्षण संरचनाओं तथा स्थानीय ग्रामीणों को मिलने वाले संभावित लाभों की जानकारी ली। भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने वन क्षेत्र में निर्मित चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का भी निरीक्षण किया। एक चेकडैम में जमा स्वच्छ पानी को देखकर उन्होंने स्वयं पानी चखकर उसकी गुणवत्ता एवं स्वाद का अनुभव किया। पानी पीने के बाद कलेक्टर ने कहा कि “इस पानी का स्वाद हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा है।” उन्होंने वर्षा जल संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल को संरक्षित कर उसका उपयोग करना पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
859 हेक्टेयर में विकसित हो रहा सघन वन
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में लगभग 859 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन वन विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत पिछले तीन वर्षों में करीब 2 लाख पौधों का रोपण एवं रखरखाव किया गया है। वहीं बीजारोपण के माध्यम से 3 लाख से अधिक पौधों की नर्सरी तैयार की गई है।
नर्सरी विकास कार्य में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्थानीय महिलाओं की सहभागिता है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं। परियोजना के आगामी चरण में एक लाख नए पौधे लगाने की तैयारी है। आने वाले वर्षों में कुल 5 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
56 चेकडैम, 45 करोड़ लीटर वर्षा जल संरक्षण का प्रयास
शिवगढ़ वन क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए विभिन्न जल संरचनाएं विकसित की गई हैं। परियोजना के अंतर्गत लगभग 56 चेकडैम बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से करीब 45 करोड़ लीटर वर्षा जल के संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा लगभग 2 करोड़ लीटर क्षमता वाले तीन सरोवरों के माध्यम से पानी का संग्रहण किया जा रहा है। इन जल संरचनाओं के पानी का उपयोग करीब 75 रेन गन तथा लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से किया जा रहा है।
14 गांवों को मिलेगा फायदा
परियोजना के आसपास की 3 ग्राम पंचायतों के 14 गांवों को जल संरक्षण एवं पर्यावरणीय गतिविधियों का लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना के माध्यम से जल संरक्षण, वन विकास, बिगड़े वनों का सुधार एवं वन सुरक्षा के साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं। ग्राम वन समितियों के सहयोग से प्राकृतिक संपदा का विकास, जल प्रबंधन, पौधरोपण, वन सुधार एवं सुरक्षा संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इससे स्थानीय आबादी को पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
अतिक्रमण की स्थिति पर भी लिया संज्ञान
भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्री कटेसरिया ने वन क्षेत्र में अतिक्रमण की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से वन क्षेत्र की सुरक्षा एवं संरक्षण के संबंध में जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकसित किए जा रहे वन क्षेत्र की सुरक्षा, पौधों का संरक्षण और जल संरचनाओं की नियमित देखरेख बेहद आवश्यक है, ताकि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र हरित विकास एवं जल संरक्षण के बेहतर मॉडल के रूप में विकसित हो सके।
कलेक्टर ने लगाया चंपा का पौधा
भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने वन क्षेत्र में चंपा का पौधा भी लगाया। उन्होंने पौधरोपण के साथ उसके संरक्षण और नियमित देखभाल पर जोर दिया। कलेक्टर ने कहा कि पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसका संरक्षण कर उसे वृक्ष के रूप में विकसित करना है।
स्थानीय सहभागिता से विकसित हो रहा प्राकृतिक संसाधन
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के जिला समन्वयक श्री निलेश शुक्ला ने कलेक्टर को संस्था की गतिविधियों एवं शिवगढ़ परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय ग्राम वन समितियों और ग्रामीण समुदाय को साथ लेकर वन विकास, जल संरक्षण, पौधरोपण एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कलेक्टर श्री कटेसरिया ने संस्था द्वारा किए जा रहे पौधरोपण, जल संरक्षण एवं स्थानीय सहभागिता के कार्यों का अवलोकन किया और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस दौरान सैलाना एसडीएम श्री कृष्णपाल सिंह बघेल, तहसीलदार सैलाना श्री मनीष जैन सहित संबंधित अधिकारी एवं हार्टफुलनेस संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

