सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर नागरिकों का घेराव और धरना; तीन बाइक की भिड़ंत में घायल छह लोगों को उपचार नहीं मिलने से बढ़ा आक्रोश, स्वास्थ्य अधिकारियों ने 26 सितंबर तक व्यवस्था सुधारने का दिया आश्वासन
नामली/ रतलाम। पुलिस दर्पण
नामली/ रतलाम। नामली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर शुक्रवार को नगरवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। अस्पताल में पर्याप्त उपचार एवं जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के आरोपों के बीच बड़ी संख्या में समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और नागरिकों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया। करीब तीन घंटे चले आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नामली में तालाबंदी की जाएगी।
हादसे के बाद सामने आई अस्पताल की व्यवस्था
आक्रोश की तत्काल वजह गुरुवार रात हुई तीन बाइकों की भिड़ंत बनी। हादसे में करीब छह लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घायलों को उपचार के लिए शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नामली लाया गया, लेकिन आंदोलनकारियों के अनुसार अस्पताल में अपेक्षित उपचार एवं जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण घायलों को निजी वाहनों से मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ा। घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर नागरिकों में नाराजगी और बढ़ गई। रात में ही समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन करने का निर्णय लिया। इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन की सूचना तेजी से नगर में प्रसारित हुई और शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे बड़ी संख्या में लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नामली के परिसर में पहुंच गए।
‘मातम का ढोल’ बजाकर जताया विरोध
अस्पताल की व्यवस्थाओं के विरोध में आंदोलनकारियों ने ‘मातम का ढोल’ बजाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। आंदोलनकारियों ने अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन, एक्स-रे मशीन सहित आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने, चिकित्सकीय सेवाओं को मजबूत करने तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ब्लॉक स्तर की स्वास्थ्य संस्था के अनुरूप विकसित करने की मांग रखी।
तहसीलदार और स्वास्थ्य अधिकारी पहुंचे
आंदोलन की सूचना प्रशासन तक पहुंचने के बाद तहसीलदार महेंद्र सिंह डांगी ,पटवारी टीकमसिह चौहान सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब तीन घंटे चले धरने के दौरान आंदोलनकारियों और अधिकारियों के बीच मांगों को लेकर चर्चा हुई। मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. किरण वाडिवा द्वारा आंदोलनकारियों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों ने 26 सितंबर की शाम तक आवश्यक आदेश जारी करने और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार की दिशा में कार्रवाई करने की बात कही। इसके बाद आंदोलनकारियों ने फिलहाल धरना समाप्त किया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यह आंदोलन केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहेगा।
24 घंटे का अल्टीमेटम
नगरवासियों ने स्वास्थ्य विभाग को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि अस्पताल में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो अगले चरण में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तालाबंदी कर आंदोलन को तेज किया जाएगा। स्थानीय आंदोलनकारियों का कहना था कि नामली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी उपचार के लिए इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। ऐसे में गंभीर मरीजों एवं दुर्घटना में घायल लोगों को तत्काल उपचार और जरूरी जांच की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिलना आवश्यक है।
झोलाछाप और अनियमित मेडिकल स्टोर का मुद्दा भी उठा
धरने के दौरान क्षेत्र में कथित रूप से संचालित झोलाछाप चिकित्सकों और नियमों के विपरीत संचालित किए जा रहे मेडिकल स्टोर्स का मुद्दा भी प्रमुखता से चर्चा रही । स्थानीय मिडिया कर्मियों ने बांगरोद, नौगांवकला सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित मेडिकल स्टोर्स की जांच और नियमों के पालन की मांग की। नामली में कथित रूप से संचालित एक निजी लैब को लेकर भी सवाल उठाए गए। स्थानीय मिडिया ने संबंधित विभाग से लैब की वैधानिकता, पंजीयन एवं जांच व्यवस्था की जांच कराने की मांग रखी।
दो नर्सों पर कार्रवाई की मांग
आंदोलन के दौरान अस्पताल में पदस्थ दो नर्सों के खिलाफ कार्रवाई की मांग का मामला भी सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले दिनों मरीजों से रुपए मांगने से संबंधित शिकायतें सामने आई थीं। अधिकारियों ने इस मामले में भी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
एक साल पहले भी उठी थी व्यवस्था सुधार की मांग
आंदोलनकारियों ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर पूर्व में भी कई बार आवाज उठाई जा चुकी है। करीब एक वर्ष पहले अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की कामना को लेकर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया था। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उनकी मांगें अभी पूरी तरह पूरी नहीं हुई हैं।
ब्लॉक स्तर का दर्जा और आधुनिक जांच सुविधाएं बनी प्रमुख मांग
नामली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ब्लॉक स्तर की बेहतर स्वास्थ्य संस्था के रूप में विकसित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। नागरिकों की प्रमुख मांगों में सोनोग्राफी, एक्स-रे सहित आवश्यक जांच सुविधाएं, पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ, मरीजों को तत्काल उपचार तथा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर जांच एवं उपचार की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हो तो सामान्य और दुर्घटना संबंधी मामलों में मरीजों को बार-बार रतलाम या मेडिकल कॉलेज रेफर करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
इनकी रही मौजूदगी
धरने में वरिष्ठ समाजसेवी बंटी डाबी, दीपक चौहान, राजेश जाट, रमेश दडींग, धन्नालाल रांगी, अजय जोगचंद, आनंद राठौर, महेश दडिगं , अशोक चौहान, नंदकिशोर चौहान, गणेश गुर्जर, बद्रीलाल गुर्जर, कमलेश कुंडल, संजय मेहता,बहादुर कुमावत सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं नगरवासी मौजूद रहे। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए 26 सितंबर तक के आश्वासन पर टिकी हैं। यदि तय समय सीमा में व्यवस्था में ठोस सुधार दिखाई देता है तो आंदोलन समाप्त माना जाएगा, अन्यथा नगरवासियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तालाबंदी कर आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है।

