हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को रखा बरकरार
नरेश साहू, पुलिस दर्पण, भोपाल
भोपाल, 30 सितंबर। मध्यप्रदेश में करीब तीन दशक पहले दर्ज हुए 300 रुपये रिश्वत के मामले में तत्कालीन पटवारी को लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद के बाद राहत मिली है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पटवारी को दोषमुक्त किया गया था। अदालत ने इस दोषमुक्ति के खिलाफ सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया।
सरकार की अपील पर हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस संजय एस. कलगांवकर की सिंगल बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने जिला अदालत द्वारा पटवारी को दोषमुक्त किए जाने के आदेश का परीक्षण किया। इसके बाद सरकार की ओर से दाखिल अपील को खारिज कर दिया गया।
निचली अदालत के आदेश को माना उचित
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में तत्कालीन पटवारी को दोषमुक्त किए जाने के निचली अदालत के आदेश को उचित माना। अदालत के इस निर्णय के साथ करीब तीन दशक से चले आ रहे इस कानूनी विवाद में आरोपी पूर्व पटवारी को राहत मिली है।
लंबे समय से चल रहा था मामला
मामला लगभग 30 वर्ष पुराना बताया गया है। तत्कालीन पटवारी पर 300 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। मामले में कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चली और अंततः जिला अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट द्वारा सरकार की अपील खारिज किए जाने के बाद निचली अदालत का दोषमुक्ति आदेश प्रभावी बना हुआ है। अदालत के फैसले से मामले में जारी लंबी कानूनी प्रक्रिया को विराम मिला है।

